
सन् 1940 में भवानीपुर (बंगाल) के द्वारिकानाथ चक्रवर्ती ने घाट के कुछ भाग का पक्का निर्माण कराया एवं घाट तट पर एक विशाल भवन भी बनवाया था। घाट तट पर नन्दीश्वर शिव मंदिर स्थापित है जिसके कारण घाट का नामकरण हुआ। घाट का प्रथम उल्लेख मोतीचन्द्र ने ‘बनारस एण्ड इट्स घाट’ में किया है। वर्तमान में घाट पक्का एवं सुदृढ़ है एवं यहां अधिकतर स्थानीय लोग ही स्नान करते हैं। सन् 1988 में राज्य सरकार के सहयोग से सिंचाई विभाग ने शेष कच्चे भाग का पक्का निर्माण एवं पक्के भाग का मरम्मत कराया था।
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