
तिजारा (राजस्थान) महाराजा द्वारा उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में घाट के दक्षिणी भाग का निर्माण कराया गया था। घाट का उल्लेख जेम्स प्रिंसेप ने भी किया है, सन् 1935 में राजा बलदेवदास बिड़ला ने काशी में निवास के लिये घाट एवं समीपवर्ती भवन को क्रय कर लिया तथा भवन एवं घाट का पक्का निर्माण कराया। घाट का उत्तरी भाग सन् 1988 के पूर्व कच्चा था तथा यहाँ धोबी लोग कपड़ा धोते थे, अतः यह धोबिया घाट के नाम से भी जाना जाता था। घाट पर गोप्रेक्षेश्वर शिव एवं गोपीगोविन्द मंदिर स्थापित है, माघ माह के पूर्णिमा को गंगा स्नान का महात्म्य है। गंगातट पर एक भवन में बलदेवदास बिड़ला द्वारा निर्मित बलदेव दास बिड़ला संस्कृत विद्यालय है तथा समीप के ही दूसरे भवन में विद्यार्थियों के निवास की व्यवस्था है। घाट स्थित बिड़ला धर्मशाला में तीर्थयात्री, साधु-सन्यासी निवास करते हैं। संस्कृत विद्यालय एवं धर्मशाला का संचालन बिड़ला ट्रस्ट के द्वारा होता है, यहाँ निःशुल्क शिक्षा, भोजन एवं वस्त्र की सुविधा प्रदान किया जाता है। वर्तमान में घाट पक्का एवं स्वच्छ है, यहाँ पर स्थानीय लोग स्नान करते हैं किन्तु माघ माह में स्नानार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है। सन् 1988 में राज्य सरकार के सहयोग से सिंचाई विभाग ने घाट का पक्का निर्माण कराया था।