
उन्नीसवीं शताब्दी में घाट का पक्का निर्माण महाराजा विजयानगरम् ने कराया था, इस घाट को लल्ली घाट भी कहते हैं। चम्पारन (बिहार) के संत लाली बाबा यहीं पर निवास करते थे जिसके कारण इसका नाम लाली घाट पड़ा। लाली बाबा द्वारा स्थापित गूदड़दास का अखाड़ा आज भी घाट पर सुरक्षित है, सन् 1831 में जेम्स प्रिन्सेप ने घाट का प्रथम उल्लेख किया था। इस घाट पर 19वीं शताब्दी का किरातेश्वर शिव मंदिर स्थापित है। एवं छोटी-छोटी देव कुलिकायें हैं, जिसमें गणेश, शिव, हनुमान की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। हरिश्चन्द्र घाट के समीप होने के कारण अधिकतर शवयात्री ही यहां स्नान आदि कार्य करते हैं। सन 1988 में सिंचाई विभाग ने इस घाट का मरम्मत कराया था।
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