
सन् 1795 में नागपुर (महाराष्ट्र) के भोंसला महाराज के द्वारा घाट एवं यहाँ स्थित विशाल महल का निर्माण कराया गया था जिसके पश्चात यह भोसला घाट के नाम से जाना जाने लगा। गीर्वाणपदमंजरी के अनुसार इसका प्राचीन नाम नागेश्वर घाट था। घाट के समीप ही नागेश्वर शिव मंदिर है जिसको काशी के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में स्थान प्राप्त है। घाट स्थित महल दुर्ग के समान तथा कलात्मकता एवं शिल्प संयोजन की दृष्टि से विशिष्ट है। गंगातट पर ही महल का प्रवेश द्वार है, महल के मध्य लक्ष्मीनारायण एवं रघुराजेश्वर (शिव) मंदिर स्थापित है।
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