चिंतामणि गणेश

काशी के अधिकतर मंदिरों में गणेश यानी विनायक की प्रतिमा स्थापित है। वेदों में गणेश का उल्लेख बृहस्पति-वाचस्पति और ब्रह्णास्पति के रूप में है। प्राचीनकाल से ही मान्यता रही है कि कोई अनुष्ठान करने से पहले गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। इसलिए विनायक का महत्व हिन्दू धर्म में बढ़ जाता है। काशी के प्रसिद्ध विनायक मंदिरों में से एक चिंतामणि गणेश का मंदिर केदारखण्ड क्षेत्र में स्थित है। सोनारपुरा से केदारघाट की ओर बढ़ने पर गली में स्थित चिंतामणि विनायक का छोटा सा मंदिर काफी प्रस़िद्ध है। इस मंदिर में नियमित रूप से भक्त दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। माना जाता है कि चिंतामणि गणेश का आशीर्वाद मिल जाने पर सभी प्रकार की समस्या सुलझ जाती है और सुख-शांति का आगमन होता है। गणेश चतुर्थी पर इस मंदिर में भव्य आयोजन किया जाता है। इस दौरान मंदिर को सजाने के साथ ही चिंतामणि विनायक का आकर्षक ढंग से श्रृंगार किया जाता है। भगवान विनायक के इस दिव्य स्वरूप का दर्शन करने के लिए काफी संख्या में भक्त मंदिर में पहुंचते हैं। वहीं भादों महीने में इनका हरियाली श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान मंदिर में भजन-कीर्तन भी होता है। जिससे मंदिर सहित आस-पास का महौल भक्तिमय हो जाता है। यह मंदिर नियमित रूप से सुबह साढ़े पांच बजे खुलता है और सुबह की आरती 6 बजे सम्पन्न होती है। मंदिर दोपहर 11 बजे तक खुला रहता है। शाम को मंदिर पुनः 5 बजे खुलता है जो रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है। शाम की आरती मन्त्रोच्चारण के बीच साढ़े 7 बजे होती है। मंदिर के पुजारी चल्ला सुब्बाराव शास्त्री हैं।

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